×
 

शक्ति सामंत को पद्म श्री मिलना चाहिए था: 100वीं जयंती पर बेटे आशीम सामंत की भावुक यादें

शक्ति सामंत की 100वीं जयंती पर बेटे आशीम ने कहा कि बहुआयामी फिल्मों के बावजूद उन्हें पद्म श्री मिलना चाहिए था, लेकिन उन्होंने कभी सम्मान के लिए प्रयास नहीं किया।

मुंबई: दिग्गज फिल्मकार शक्ति सामंत की 100वीं जयंती के अवसर पर उनके बेटे आशीम सामंत ने भारतीय सिनेमा में अपने पिता के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय सम्मान पद्म श्री मिलना चाहिए था। आशीम का कहना है कि “आराधना”, “अमर प्रेम” और “कश्मीर की कली” जैसी कालजयी फिल्मों के बावजूद उनके पिता को वह सरकारी सम्मान नहीं मिला, जिसके वे पूर्ण रूप से हकदार थे।

आशीम सामंत ने कहा कि शक्ति सामंत एक बहुआयामी कहानीकार थे, जिन्होंने विभिन्न विधाओं में सहजता से काम किया। उनकी पहली हिंदी फिल्म “बहू” से लेकर क्राइम थ्रिलर “हावड़ा ब्रिज”, रोमांटिक थ्रिलर “चाइना टाउन” और “एन इवनिंग इन पेरिस” तक, हर शैली में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। वहीं “आराधना”, “अमर प्रेम” और “कश्मीर की कली” जैसी फिल्मों ने उन्हें रोमांटिक सिनेमा का पर्याय बना दिया।

अपने पिता के व्यक्तित्व पर बात करते हुए आशीम ने कहा कि शक्ति सामंत कभी भी किसी सम्मान के लिए प्रयास करने या सिफारिश कराने वाले व्यक्ति नहीं थे। उनका मानना था कि यदि सम्मान अपने आप मिले तो ठीक, लेकिन उसके लिए आग्रह करना उनके स्वभाव में नहीं था। आशीम के अनुसार, उस दौर में कई पुरस्कार और सम्मान राजनीतिक या सिफारिशों के जरिए आगे बढ़ाए जाते थे, लेकिन उनके पिता ने कभी इस रास्ते को नहीं अपनाया।

और पढ़ें: शक्सगाम घाटी में किसी भी गतिविधि को भारत मंजूरी नहीं देता: सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी

100वीं जयंती पर फिल्म जगत के लिए यह अवसर है कि वह शक्ति सामंत के योगदान को नए सिरे से याद करे। उनकी फिल्मों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि संगीत, कहानी और भावनाओं के स्तर पर हिंदी सिनेमा को समृद्ध किया। आशीम सामंत का मानना है कि भले ही उनके पिता को पद्म सम्मान न मिला हो, लेकिन दर्शकों का प्यार और सिनेमा में अमर विरासत ही उनका सबसे बड़ा पुरस्कार है।

और पढ़ें: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना: साबरमती हाई-स्पीड रेल मल्टीमॉडल हब को IGBC गोल्ड रेटिंग

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share