मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना: साबरमती हाई-स्पीड रेल मल्टीमॉडल हब को IGBC गोल्ड रेटिंग
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़े साबरमती हाई-स्पीड रेल मल्टीमॉडल हब को IGBC गोल्ड रेटिंग मिली है, जो टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचे की बड़ी उपलब्धि है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से जुड़ी एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। गुजरात के साबरमती में स्थित हाई-स्पीड रेल मल्टीमॉडल हब को इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) की गोल्ड रेटिंग से सम्मानित किया गया है। यह भारत के हाई-स्पीड रेल सेक्टर में सतत और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने एक बयान में कहा कि यह भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़ी पहली इमारत है, जिसे प्रतिष्ठित IGBC ग्रीन सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि परियोजना में अपनाए गए पर्यावरणीय मानकों, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ निर्माण तकनीकों को दर्शाती है।
साबरमती हाई-स्पीड रेल मल्टीमॉडल हब को यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। यह हब साबरमती रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, निर्माणाधीन साबरमती बुलेट ट्रेन स्टेशन और बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (BRTS) से निर्बाध रूप से जुड़ा हुआ है। इस एकीकृत ढांचे का उद्देश्य यात्रियों को विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच आसान और सुगम आवागमन उपलब्ध कराना है।
यह मल्टीमॉडल हब बुलेट ट्रेन स्टेशन के पूर्वी हिस्से में स्थित है और इसे तीन फुट ओवरब्रिज (FOB) से जोड़ा गया है। इन फुट ओवरब्रिज में ट्रैवलेटर लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को चलने में अतिरिक्त सुविधा मिलती है।
हब की इमारत के अग्रभाग पर स्टेनलेस स्टील से बना एक भव्य म्यूरल लगाया गया है, जो दांडी मार्च आंदोलन को दर्शाता है। यह न केवल स्थापत्य सौंदर्य को बढ़ाता है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को भी सम्मान देता है।
IGBC गोल्ड रेटिंग मिलने से यह स्पष्ट होता है कि साबरमती मल्टीमॉडल हब ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन जैसे मानकों पर खरा उतरता है। यह उपलब्धि भविष्य में देश की अन्य बड़ी रेल और परिवहन परियोजनाओं के लिए एक उदाहरण बनेगी।
और पढ़ें: भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी का बड़ा कदम: ट्रांजिट वीज़ा से मिली राहत