दिल्ली में अघोषित इमर्जेंसी, शशि थरूर ने केंद्र पर साधा निशाना, बोले- इससे चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं लौटेगा
शशि थरूर ने सीजेपी प्रदर्शन से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा और हिरासत की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों से निर्वाचन आयोग पर जनता का भरोसा बहाल नहीं होगा।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने राजधानी की स्थिति को ‘अघोषित इमर्जेंसी’ बताते हुए कहा कि इससे भारतीय निर्वाचन आयोग पर जनता का भरोसा बहाल नहीं होगा।
केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद थरूर ने शनिवार को कहा कि सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में लोगों की आवाजाही पर व्यापक पाबंदियां लगाई गई हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जंतर-मंतर विरोध और असहमति की आवाज उठाने के लिए निर्धारित स्थान है।
थरूर ने राजधानी में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब महिलाओं को सुरक्षा की जरूरत होती है, तब इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल और ऐसी तत्परता कहां गायब हो जाती है। उन्होंने प्रदर्शन से जुड़े लोगों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की भी आलोचना की।
कांग्रेस सांसद ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके और यूट्यूबर ध्रुव राठी सहित हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रदर्शनकारी सोमवार को दोबारा दिल्ली लौटते हैं, तो क्या सरकार फिर से राजधानी में इसी तरह प्रतिबंध लगाएगी?
थरूर ने कहा कि युवाओं को ऐसी स्थिति नहीं मिलनी चाहिए, जिसमें उनकी आवाज दबा दी जाए। उनके मुताबिक, चुनावों की निष्पक्षता पर भरोसा रखने वाली सरकार को सवालों का स्वागत करना चाहिए। राजधानी को किले में बदलने से संदेह दूर होने के बजाय और गहरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को लाठियों और दमन के बजाय जवाब और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सीजेपी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी के समर्थक देशव्यापी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को भी हिरासत में लिए जाने की खबर है।
वाम दलों, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने प्रदर्शन का समर्थन किया है। हालांकि, कांग्रेस ने 10 अक्टूबर के इस आंदोलन से दूरी बनाए रखी है, जबकि उसके नेता चुनावों में कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।