12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR: शहरी इलाकों में गणना फॉर्म संग्रह काफी कम
चुनाव आयोग के अनुसार SIR के तहत शहरी क्षेत्रों में मतदाता गणना फॉर्म संग्रह ग्रामीण इलाकों से काफी कम है, जिसका कारण कामकाजी व्यस्तता और लगातार पलायन माना जा रहा है।
चुनाव आयोग (ECI) के अधिकारियों ने शुक्रवार (2 जनवरी, 2026) को बताया कि नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) के दौरान शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं से गणना फॉर्म (एन्यूमरेशन फॉर्म) का संग्रह ग्रामीण इलाकों की तुलना में “काफी कम” रहा है। यह जानकारी उपलब्ध रुझानों के आधार पर दी गई है।
अधिकारियों के अनुसार, शहरी इलाकों में फॉर्म कम जमा होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि कई मतदाता कामकाजी या पेशेवर व्यस्तताओं के कारण घर पर उपलब्ध नहीं रहते। इसके अलावा, लगातार होने वाला पलायन भी फॉर्म संग्रह में कमी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
इसके विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा गणना फॉर्म का संग्रह काफी अधिक दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ, कानपुर और नोएडा जैसे शहरों में फॉर्म संग्रह “काफी कम” रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह का रुझान पिछले वर्ष बिहार में मतदाता सूची की सफाई (वोटर क्लीन-अप) के दौरान पटना जैसे शहरों में भी देखा गया था।
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SIR का दूसरा चरण 4 नवंबर से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ था। उत्तर प्रदेश को छोड़कर अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रारूप मतदाता सूची (ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल) प्रकाशित की जा चुकी है।
असम में मतदाता सूची का एक अलग ‘विशेष पुनरीक्षण’ चल रहा है। राज्यों में अंतिम SIR को कट-ऑफ तिथि माना जाएगा, जैसे बिहार में 2003 की मतदाता सूची को गहन पुनरीक्षण के लिए आधार बनाया गया था।
SIR का मुख्य उद्देश्य जन्म स्थान की जांच के माध्यम से अवैध विदेशी प्रवासियों को चिन्हित कर मतदाता सूची से हटाना है। बांग्लादेश और म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में चल रही कार्रवाई के मद्देनजर यह प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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