सीतापुर में कांग्रेस को खाली करना होगा कार्यालय, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेदखली पर रोक से किया इनकार
सीतापुर में कांग्रेस कार्यालय को खाली करने के नगर पालिका के आदेश पर हाई कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया। जमीन नजूल होने और वैध आवंटन नहीं मिला।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर में कांग्रेस को अपना कार्यालय खाली करना होगा। नगर पालिका परिषद ने शहर कांग्रेस कमेटी को कार्यालय खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। कांग्रेस ने इस आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में चुनौती देते हुए बेदखली पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत ने कांग्रेस नगर अध्यक्ष की याचिका खारिज करते हुए अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने कहा कि सरकारी जमीन पर लंबे समय तक कब्जा रहने से वह कब्जा कानूनी नहीं हो जाता। अदालत ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई वैध आवंटन आदेश, समझौता या दस्तावेज पेश नहीं कर सके, जिससे संपत्ति पर उनके कानूनी अधिकार की पुष्टि होती हो।
मामला सीतापुर के घंटाघर की ऐतिहासिक इमारत की पहली मंजिल पर संचालित कांग्रेस कार्यालय से जुड़ा है। यह कार्यालय नजूल भूखंड संख्या 244/1 पर स्थित है। नगर पालिका की प्रभारी अधिशासी अधिकारी सीमा सिंह ने कार्यालय खाली करने का नोटिस जारी किया था।
कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि वर्ष 1971-72 से कार्यालय पर उसका कब्जा है और तत्कालीन सरकार ने इसे आवंटित किया था। कांग्रेस ने 1971 में 320 रुपये किराया जमा करने की रसीद भी अदालत में पेश की। हालांकि, नगर पालिका के रिकॉर्ड में पिछले कई दशकों के दौरान किराया जमा करने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
नगर पालिका ने कहा कि कांग्रेस ने आखिरी बार 6 फरवरी 1971 को केवल 320 रुपये जमा किए थे। इसके बाद करीब 55 वर्षों तक किराया नहीं दिया गया। साथ ही, कार्यालय के वैध आवंटन से संबंधित कोई रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है।
राज्य सरकार ने अदालत में कांग्रेस की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जमीन नजूल संपत्ति है और उस पर कब्जा कानूनी नहीं है। हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत की मांग खारिज कर दी और संबंधित पक्षों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया है।
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