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रिहाई के बाद आंदोलन नहीं करेंगे सोनम वांगचुक, संवाद से जारी रखेंगे लड़ाई: गीतांजलि

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने कहा कि रिहाई के बाद वे आंदोलन नहीं करेंगे, बल्कि लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों के लिए संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाएंगे।

जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद उनके आंदोलन की दिशा को लेकर नई जानकारी सामने आई है। उनकी पत्नी और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) की सह-संस्थापक गीतांजलि जे. आंगमो ने कहा कि रिहाई के बाद वांगचुक विरोध और आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाएंगे, बल्कि लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग को संवाद और सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाएंगे।

एक साक्षात्कार में गीतांजलि आंगमो ने कहा कि बार-बार लंबे उपवास और विरोध प्रदर्शन करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, “हर बार 15 से 30 दिन तक उपवास पर कौन बैठना चाहता है? 24 सितंबर 2025 हमारे लिए एक काला दिन था। अब आंदोलन और विरोध के बजाय हम बातचीत और सहयोग के जरिए समाधान खोजने की कोशिश करेंगे।”

सोनम वांगचुक को पहले राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वे लंबे समय से लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। उनके नेतृत्व में कई बार शांतिपूर्ण आंदोलन और भूख हड़ताल भी हुए हैं।

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गीतांजलि आंगमो ने कहा कि वांगचुक की रिहाई के बाद उनका उद्देश्य लद्दाख के विकास और संरक्षण के लिए सकारात्मक रास्ता अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि वे लद्दाख को एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करना चाहते हैं, जहां पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन का मकसद हमेशा लोगों के हित और क्षेत्र के भविष्य को सुरक्षित करना रहा है, और अब संवाद के जरिए स्थायी समाधान खोजने पर जोर दिया जाएगा।

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