साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ तक: पीएम के नए कार्यालय की अंदरूनी कहानी, जहां बना है इंडिया हाउस
प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ में स्थानांतरित होगा, जहां खुले डिजाइन, आधुनिक तकनीक और ‘इंडिया हाउस’ जैसी सुविधाएं नई कार्य-संस्कृति और सेवा आधारित शासन को दर्शाती हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) जल्द ही साउथ ब्लॉक की भव्य बलुआ पत्थर की इमारत से निकलकर सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बने नए कार्यकारी परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित होने जा रहा है। यह बदलाव न केवल एक नई इमारत में शिफ्ट होने का संकेत है, बल्कि पुराने प्रशासनिक ढांचे, कार्य संस्कृति और सत्ता के प्रतीकों से एक निर्णायक दूरी भी दर्शाता है।
दशकों तक साउथ ब्लॉक सत्ता, अनुशासन और पदानुक्रम का प्रतीक रहा। मोटी दीवारें, संकरे गलियारे और बंद कमरे सत्ता के संचालन की पहचान थे। यहां पहुंच सीमित थी और निर्णय प्रक्रिया भारी दरवाजों के पीछे सिमटी रहती थी। इसके विपरीत, सेवा तीर्थ एक खुले और सहयोगात्मक कार्य-संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है।
नया प्रधानमंत्री कार्यालय ओपन-फ्लोर डिजाइन पर आधारित है। यहां बंद केबिनों के बजाय साझा कार्यस्थल बनाए गए हैं, ताकि अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय, संवाद और तेज निर्णय प्रक्रिया संभव हो सके। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस डिजाइन का उद्देश्य औपचारिकता की परतों को कम करना और टीमवर्क को बढ़ावा देना है।
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जहां साउथ ब्लॉक में औपनिवेशिक वास्तुकला की छाप थी, वहीं सेवा तीर्थ में आधुनिक डिजाइन के साथ भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक प्रतीकों का समावेश किया गया है। इंटीरियर में भारतीय विरासत से प्रेरित रूपांकन हैं, जबकि संरचना को कार्यात्मक और सरल रखा गया है। प्रधानमंत्री के निजी और औपचारिक बैठक कक्षों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी आधुनिक सुविधाओं के साथ कर सकें।
तकनीक के स्तर पर भी बड़ा बदलाव है। सेवा तीर्थ को शुरुआत से ही एन्क्रिप्टेड संचार प्रणाली, उन्नत साइबर सुरक्षा नेटवर्क और एकीकृत सुरक्षा ढांचे के साथ बनाया गया है। यह भवन भूकंपरोधी है और हर परिस्थिति में कार्यशील रहने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस परिसर में ‘इंडिया हाउस’ नामक एक अत्याधुनिक सम्मेलन सुविधा भी है, जहां द्विपक्षीय वार्ताएं, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रेस संवाद आयोजित किए जा सकेंगे। पहले PMO में ऐसी समर्पित व्यवस्था नहीं थी।
सेवा तीर्थ एक ही परिसर में शासन के प्रमुख केंद्रों को समेटता है। सेवा तीर्थ-1 में PMO, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय होगा। पहले ये संस्थान अलग-अलग स्थानों से संचालित होते थे।
इस बदलाव का वैचारिक संदेश भी है। ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के बजाय इसका नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया, जो सत्ता से अधिक सेवा को शासन के केंद्र में रखता है। लगभग 1,200 करोड़ रुपये की लागत से बना यह परिसर शासन की नई सोच और कार्यशैली का प्रतीक माना जा रहा है।
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