मार्शल लॉ मामला: दक्षिण कोरियाई अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को 23 साल की सजा सुनाई
दक्षिण कोरिया की अदालत ने मार्शल लॉ से जुड़े विद्रोह मामले में पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को 23 साल की जेल की सजा सुनाई, फैसला सुप्रीम कोर्ट में चुनौती योग्य है।
दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने बुधवार (21 जनवरी 2026) को पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को 23 साल की जेल की सजा सुनाई। यह सजा दिसंबर 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक-योल द्वारा मार्शल लॉ घोषित किए जाने से जुड़े विद्रोह के एक प्रमुख कृत्य में शामिल होने सहित कई गंभीर आरोपों में दी गई है।
सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि हान डक-सू को दोषी इसलिए ठहराया गया क्योंकि उन्हें उस कैबिनेट बैठक के “औपचारिक स्वरूप” को तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाला माना गया, जिसने मार्शल लॉ की घोषणा का रास्ता साफ किया। अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया को “ऊपर से थोपे गए विद्रोह” (टॉप-डाउन इंसरेक्शन) की संज्ञा दी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त के इन कृत्यों के कारण दक्षिण कोरिया को उस अंधकारमय अतीत में लौटने का खतरा पैदा हो गया था, जब नागरिकों के मूल अधिकारों और उदार लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लंघन किया जाता था। न्यायालय के अनुसार, यदि ऐसे कदमों को रोका नहीं जाता, तो देश लंबे समय तक तानाशाही के दलदल से बाहर नहीं निकल पाता।
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निचली अदालत ने हान डक-सू को शपथ के तहत झूठ बोलने (परजरी) और झूठे आधिकारिक दस्तावेज तैयार करने जैसे अन्य संबंधित आरोपों में भी दोषी ठहराया। हालांकि हान ने परजरी के एक आंशिक आरोप को छोड़कर बाकी सभी आरोपों से इनकार किया था।
76 वर्षीय हान डक-सू मार्शल लॉ से सीधे जुड़े आपराधिक आरोपों में निचली अदालत से सजा पाने वाले पहले पूर्व कैबिनेट मंत्री हैं। अदालत के फैसले के तुरंत बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है और उन्हें उम्मीद है कि यह मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा। इस फैसले को दक्षिण कोरिया के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है।
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