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एसआरसीसी ने सोशल मीडिया पर लगाए गए जातिगत भेदभाव के आरोपों को किया खारिज

एसआरसीसी ने सोशल मीडिया पर वायरल जातिगत भेदभाव और पैसों के लेन-देन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी किसी घटना की कॉलेज को कोई जानकारी या शिकायत नहीं मिली है।

श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि आरक्षित वर्ग का एक छात्र, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज न करने के बदले अनारक्षित वर्ग के एक छात्र से पैसे मांग रहा था। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की किसी भी घटना की न तो कॉलेज में रिपोर्ट की गई है और न ही प्रशासन को ऐसी किसी कथित घटना की कोई जानकारी है।

गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को जारी एक आधिकारिक सर्कुलर में एसआरसीसी ने कहा, “कॉलेज में ऐसी किसी कथित घटना की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है और न ही कॉलेज को इस तरह की किसी घटना के घटित होने की जानकारी है। जो भी दावे या आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी पूरी जिम्मेदारी दावे करने वालों की है।”

कॉलेज ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर साझा की जा रही इन आरोपों से उसका कोई संबंध नहीं है। प्रशासन के अनुसार, यह बयान तथ्यों को स्पष्ट करने और गलत सूचना के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया है। सोशल मीडिया पर इन दावों के सामने आने के बाद विभिन्न मंचों पर बहस छिड़ गई थी, जिसके चलते कॉलेज को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

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यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित ‘इक्विटी रेगुलेशंस’ पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि यह ढांचा प्रथम दृष्टया अस्पष्ट है और इसके दूरगामी तथा गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जो समाज को विभाजित करने का खतरा पैदा कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि ये नए नियम 13 जनवरी, 2026 को अधिसूचित किए गए थे, जिनके तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी कमेटियों’ का गठन अनिवार्य किया गया था, ताकि भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच की जा सके और समानता को बढ़ावा दिया जा सके।

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