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स्वस्थ उम्र बढ़ने की नई कुंजी: वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल के ‘पड़ोस’ की अहम भूमिका की पहचान की

वैज्ञानिकों ने पाया कि स्टेम कोशिकाओं के आसपास की सहायक कोशिकाओं का कमजोर होना उम्र बढ़ने का प्रमुख कारण हो सकता है, जिससे ऊतक पुनर्जनन प्रभावित होता है।

वैज्ञानिकों ने उम्र बढ़ने की जैविक प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण खोज की है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि ऊतकों का क्षय केवल स्टेम कोशिकाओं की आंतरिक कमजोरी से नहीं, बल्कि उन्हें सहारा देने वाली आसपास की सहायक कोशिकाओं के कमजोर होने से भी शुरू हो सकता है। यह शोध स्वस्थ वृद्धावस्था और दीर्घकालिक ऊतक पुनर्जनन के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलता है।

यह अध्ययन पुणे स्थित आघारकर अनुसंधान संस्थान में किया गया, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्टेम सेल रिपोर्ट्स में कवर लेख के रूप में प्रकाशित किया गया है।

अध्ययन में फल मक्खी ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर को मॉडल के रूप में उपयोग किया गया। वैज्ञानिकों ने प्रजनन तंत्र में मौजूद जर्मलाइन स्टेम कोशिकाओं का अध्ययन किया, जिन्हें विशेष “कैप सेल्स” सहारा देती हैं। ये कैप सेल्स एक सूक्ष्म पर्यावरण या ‘निश’ बनाती हैं, जो स्टेम कोशिकाओं की पहचान और कार्यक्षमता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

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शोध में पाया गया कि जर्मलाइन स्टेम कोशिकाएं कम स्तर की ऑटोफैजी के बावजूद मजबूत बनी रहती हैं, जबकि कैप सेल्स का दीर्घकालिक अस्तित्व ऑटोफैजी पर अत्यधिक निर्भर करता है। जब कैप सेल्स में Atg1, Atg5 और Atg9 जैसे ऑटोफैजी से जुड़े जीन निष्क्रिय किए गए, तो इन सहायक कोशिकाओं में क्षति बढ़ी, संरचना कमजोर हुई और वे स्टेम कोशिकाओं को सहारा देने में असफल रहीं।

कैप सेल्स के कमजोर पड़ते ही आवश्यक जैव-रासायनिक संकेत, जैसे बोन मॉर्फोजेनेटिक प्रोटीन (BMP), बाधित हो गए। परिणामस्वरूप स्टेम कोशिकाएं भी धीरे-धीरे नष्ट हो गईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ऊतक क्षय का सीधा संबंध सूक्ष्म पर्यावरण की सेहत से है।

यह शोध उम्र बढ़ने को केवल व्यक्तिगत कोशिकाओं की समस्या मानने की पारंपरिक धारणा को चुनौती देता है और इसे सामूहिक कोशिकीय प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सहायक कोशिकाओं की रक्षा कर स्टेम कोशिकाओं की कार्यक्षमता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है, जिससे भविष्य में प्रजनन क्षमता, ऊतक स्वास्थ्य और पुनर्जनन को संरक्षित करने की नई रणनीतियां विकसित हो सकती हैं।

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