सुप्रीम कोर्ट ने फांसी के बजाय मौत की सजा देने के वैकल्पिक तरीके की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी के बजाय वैकल्पिक तरीके से मृत्युदंड देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी, लेकिन सरकार को विकल्प तलाशने की छूट दी।
सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने के बजाय किसी अन्य, अधिक सम्मानजनक और कम पीड़ादायक तरीके से मृत्युदंड देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत फांसी से मृत्युदंड दिए जाने को चुनौती देने वाली इस याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज किया। याचिका में दलील दी गई थी कि फांसी के जरिए मौत की सजा देना अत्यधिक पीड़ादायक प्रक्रिया हो सकती है और दोषियों के लिए मृत्युदंड लागू करने का कोई वैकल्पिक एवं अधिक मानवीय तरीका अपनाया जाना चाहिए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसका यह फैसला केंद्र सरकार को मृत्युदंड दिए जाने की प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा करने से नहीं रोकता। यदि केंद्र सरकार मौजूदा व्यवस्था पर दोबारा विचार करना चाहती है और मृत्युदंड लागू करने के लिए कोई वैकल्पिक तरीका विकसित करना चाहती है, तो वह ऐसा कर सकती है।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मृत्युदंड देने के तरीके को लेकर व्यापक नीतिगत समीक्षा का अधिकार सरकार के पास है। यानी सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा फैसले का अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में मृत्युदंड देने के तरीके में बदलाव की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है।
गौरतलब है कि 1 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन याचिकाओं में मौत की सजा को लागू करने के लिए फांसी के स्थान पर अधिक गरिमापूर्ण और वैकल्पिक तरीका अपनाने की मांग की गई थी।
अब अदालत के फैसले के बाद मौजूदा व्यवस्था के तहत फांसी की प्रक्रिया जारी रहेगी। हालांकि, केंद्र सरकार चाहे तो मृत्युदंड लागू करने के वैकल्पिक तरीकों पर अलग से विचार कर सकती है।
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