सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठ को भेजा मामला, क्या DPDP कानून गोपनीयता का उपयोग करके लोगों के अधिकार को नष्ट कर रहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने DPDP कानून के तहत गोपनीयता के अधिकार से सूचना के अधिकार को सीमित करने पर संविधान पीठ को निर्देशित किया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह कानून नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी, 2026) को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए एक संविधान पीठ को यह मामला भेजने का निर्णय लिया। यह मामला डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट 2023 के खिलाफ दायर याचिकाओं से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस नए कानून से नागरिकों के सूचना के अधिकार (RTI) पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
कई याचिकाओं में यह दलील दी गई कि DPDP एक्ट का सेक्शन 44(3) सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदनकर्ताओं को ‘व्यक्तिगत जानकारी’ का खुलासा करने से रोकता है, जिससे सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही को नुकसान पहुँचता है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस.ए. बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन न्यायधीशों की पीठ ने याचिकाओं पर विचार करते हुए एक अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार किया। इस खंड का उपयोग करते हुए नागरिकों को गोपनीयता के अधिकार के नाम पर सूचना के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
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इस संदर्भ में याचिकाकर्ताओं का कहना है कि DPDP कानून संविधान के तहत नागरिकों को प्राप्त उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने इसे ‘संपूर्ण प्रतिबंध’ करार देते हुए इसे सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही को कमजोर करने वाला कदम बताया।