आवारा कुत्तों के मुद्दे पर मानवीय रुख अपनाए सुप्रीम कोर्ट, पशु अधिकार समूहों की अपील
पशु अधिकार समूहों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर मानवीय समाधान की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट से नवंबर के आदेश की समीक्षा का आग्रह किया, साथ ही फीडर्स पर हमलों का मुद्दा उठाया।
देश में तेजी से बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या और उससे जुड़े पशु कल्याण व सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे पर पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को इन संगठनों ने शीर्ष अदालत से नवंबर में दिए गए अपने आदेश की समीक्षा करने का आग्रह किया और आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कई मानवीय उपाय सुझाए, खासकर शहरी इलाकों में।
ये याचिकाएं उस पृष्ठभूमि में दाखिल की गई हैं, जहां एक ओर आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पशु प्रेमी और कार्यकर्ता यह कह रहे हैं कि समस्या का समाधान हिंसक या अमानवीय तरीकों से नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि नसबंदी, टीकाकरण और वैज्ञानिक प्रबंधन जैसे उपाय ही दीर्घकालिक समाधान हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी ने, जो एक पशु अधिकार कार्यकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, अदालत को बताया कि कई जगहों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं पर तथाकथित सतर्कता समूहों (विजिलांट्स) द्वारा हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाता है और कुछ हाउसिंग सोसायटियों ने तो कुत्तों को खाना खिलाने से रोकने के लिए बाउंसर तक तैनात कर रखे हैं।
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वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाइयों को स्थानीय प्रशासन की मौन सहमति प्राप्त है, जिससे पशु प्रेमियों और फीडर्स में डर का माहौल बन रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अदालत को ऐसा संतुलित और संवेदनशील ढांचा तैयार करना चाहिए, जिससे एक ओर आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और दूसरी ओर पशुओं के अधिकारों और कल्याण की भी रक्षा हो सके।
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