×
 

भगदड़ रोकथाम पर व्यापक निर्देश देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने भगदड़ रोकने पर व्यापक निर्देश देने से इनकार करते हुए कहा कि यह नीति और कानून-व्यवस्था का विषय है, जिस पर MHA और ECI विचार करें।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (22 जनवरी, 2026) को बड़ी सार्वजनिक सभाओं, धार्मिक आयोजनों, राजनीतिक रैलियों और यात्राओं के दौरान भगदड़ की घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक और सर्वसमावेशी निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। यह फैसला भगदड़ रोकथाम को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान लिया गया।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे, ने याचिकाकर्ता को इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष अपनी बात रखने की अनुमति दी।

सुनवाई की शुरुआत में ही CJI सूर्यकांत ने भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा को लेकर बुनियादी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि याचिका में केंद्र सरकार को बड़ी सार्वजनिक सभाओं के लिए बाध्यकारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने और लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें राजनीतिक रैलियों के दौरान आदर्श आचार संहिता के समय SOP लागू करने और राष्ट्रीय स्तर पर भीड़ प्रबंधन सुरक्षा संहिता तैयार करने की भी मांग शामिल है।

और पढ़ें: एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: ईसीआई के आदेश में अवैध घुसपैठ का स्पष्ट उल्लेख नहीं, पीठ की टिप्पणी

पीठ ने कहा कि यह मुद्दा मुख्य रूप से राज्यों और केंद्र की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी से जुड़ा है और ऐसी नीतियां बनाना कानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों और विशेषज्ञों का क्षेत्र है। चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही 18 दिसंबर, 2025 को MHA को प्रतिवेदन दे चुका है, इसलिए अदालत ने इस स्तर पर याचिका का निपटारा करना उचित समझा। साथ ही निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता अपने प्रतिवेदन की एक प्रति निर्वाचन आयोग को भी दे सकता है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल किया कि क्या अदालत इस तरह के सर्वव्यापी निर्देश जारी कर सकती है। CJI ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी स्थान की क्षमता 10,000 लोगों की है और वहां 50,000 लोग पहुंच जाएं, तो ऐसी स्थिति में अदालत-निर्देशित नियम कैसे लागू होंगे।

याचिकाकर्ता के वकील ने करूर और RCB कार्यक्रम जैसी हालिया त्रासदियों का हवाला देते हुए कहा कि देश में भीड़ सुरक्षा को लेकर न्यूनतम मानक तय किए जाने चाहिए। हालांकि, अदालत ने कहा कि प्रशासन को कुछ “समय” दिया जाना चाहिए और इसी आधार पर PIL का निपटारा कर दिया।

और पढ़ें: मध्य प्रदेश की भोजशाला में हिंदू-मुस्लिम दोनों को शुक्रवार को पूजा की अनुमति, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share