एसआईआर विवाद और 10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, पुलिस कार्रवाई और मेट्रो प्रतिबंधों पर भी नजर
सुप्रीम कोर्ट आज एसआईआर में पारदर्शिता, मतदाता सूची से नाम हटाने और 10 अक्टूबर के दिल्ली प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई, मेट्रो प्रतिबंधों तथा इंटरनेट सेवाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।
सुप्रीम कोर्ट में आज मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई तथा प्रतिबंधों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई होगी। राहुल गांधी समेत विपक्ष के 13 नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ चुनाव आयोग के विवादित फैसलों से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग पर विचार करेगी। याचिकाकर्ताओं ने आयोग से बैठकों के एजेंडे, कार्यवृत्त, आधिकारिक टिप्पणियां, आपत्तियां और संबंधित फाइलें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने ईसीआईनेट और ईआरओनेट प्रणालियों के लॉग तथा 24 जून 2025 को देशभर में एसआईआर शुरू करने के फैसले का पूरा रिकॉर्ड भी मांगा है।
याचिका में मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों का विवरण भी मांगा गया है। विपक्ष ने सवाल उठाया है कि इन बदलावों को किसने मंजूरी दी और संबंधित बैठक में क्या निर्णय लिया गया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, फैसलों की वैधता की जांच संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के संबंधित कानून के तहत होनी चाहिए।
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एसआईआर पर रोक और मतदाताओं की सुरक्षा की मांग
विपक्षी नेताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि विवादों का निपटारा होने तक विभिन्न राज्यों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाए।
याचिका में हटाए गए मतदाताओं की बूथवार सूची, नाम हटाने के कारण तथा उम्र और लिंग के आधार पर आंकड़े प्रकाशित करने की मांग भी शामिल है। गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने की प्रभावी व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी प्रसाद यादव, सुप्रिया सुले, संजय राउत और डी. राजा समेत अन्य नेता शामिल हैं। चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मामले में पक्षकार हैं।
दिल्ली प्रदर्शन पर भी होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट 10 अक्टूबर के दिल्ली प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगा। इनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई, वकीलों को हिरासत में लेने, विपक्षी नेताओं को कथित तौर पर नजरबंद करने और सार्वजनिक आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के आरोप शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं ने मेट्रो और रेल सेवाओं में कथित बाधा, सड़कों की नाकाबंदी तथा इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने की वैधता पर सवाल उठाए हैं। मामले में केंद्र सरकार, पुलिस अधिकारियों और मेट्रो प्रमुख के खिलाफ अवमानना याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं।
रविवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इन मामलों में मतदाताओं के अधिकार, संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए हैं।