पटना हाईकोर्ट के दुष्कर्म प्रयास फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के दुष्कर्म प्रयास मामले में दिए फैसले का स्वत: संज्ञान लिया। पीठ ने फैसले की कुछ टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताते हुए रजिस्ट्री को नोटिस जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के 9 जुलाई 2026 के उस फैसले का बुधवार को स्वत: संज्ञान लिया, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसकी छाती दबाने की घटना को दुष्कर्म के प्रयास के अपराध के लिए पर्याप्त नहीं माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताया और पटना हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को नोटिस जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले पर स्वत: संज्ञान लिया। पीठ ने कहा कि फैसले में कुछ ऐसी टिप्पणियां हैं जिन पर विचार किया जाना जरूरी है। मामले में सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के फैसले और संबंधित कानूनी पहलुओं की समीक्षा करेगा।
क्या था पटना हाईकोर्ट का फैसला?
पटना हाईकोर्ट ने एक फोटोग्राफी स्टूडियो में महिला के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी की दुष्कर्म के प्रयास की दोषसिद्धि रद्द कर दी थी। अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को इस स्तर तक साबित नहीं कर पाया कि घटना को दुष्कर्म का प्रयास माना जा सके।
हाईकोर्ट के अनुसार, महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसकी छाती दबाने की घटना भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने के अपराध की श्रेणी में आ सकती है, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दुष्कर्म के प्रयास का अपराध साबित नहीं होता।
2008 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला बिहार के बांका जिले का है। वर्ष 2008 में एक युवती ने स्टूडियो मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि वह अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने स्टूडियो गई थी, जहां आरोपी ने दरवाजा बंद कर उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की।
2013 में बांका की निचली अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास का दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। करीब 13 साल बाद 9 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि रद्द कर आरोपी को बरी कर दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर स्वत: संज्ञान लेकर मामले को जांच के दायरे में लिया है।
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