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उम्मीद है अमेरिका जैसी अलग-अलग स्कूल व्यवस्था न बने: यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

यूजीसी के नए इक्विटी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए कहा कि शिक्षा में विभाजन खतरनाक है और भारत को अमेरिका जैसी अलगाव वाली स्कूल व्यवस्था से बचना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। इन नियमों के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें आरोप लगाया गया कि यूजीसी ने जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को संकीर्ण और गैर-समावेशी रखा है तथा कुछ वर्गों को संस्थागत संरक्षण से बाहर कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए कहा कि इन नियमों की उच्च स्तरीय समिति द्वारा दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था में एकता और समावेशन की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि भारत की एकता हमारे शैक्षणिक संस्थानों में झलकनी चाहिए। 75 वर्षों के बाद भी अगर हम एक वर्गहीन समाज की ओर नहीं बढ़ पा रहे हैं, तो यह चिंता का विषय है। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या हम एक प्रगतिशील समाज से पीछे की ओर जा रहे हैं।

रैगिंग के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबसे गंभीर समस्या यह है कि दक्षिण या पूर्वोत्तर भारत से आने वाले छात्र अपनी संस्कृति के साथ आते हैं और उनसे अलग पृष्ठभूमि के लोग उन पर टिप्पणियां करने लगते हैं। अलग-अलग छात्रावासों की बात पर अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि आज समाज में अंतरजातीय विवाह आम हो रहे हैं और छात्रावासों में सभी एक साथ रहते आए हैं।

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अदालत ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि भारत को अमेरिका जैसी अलगाव वाली स्कूल व्यवस्था की ओर नहीं जाना चाहिए, जहां कभी अश्वेत और श्वेत छात्रों के लिए अलग-अलग स्कूल हुआ करते थे। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति का दुरुपयोग शरारती तत्व कर सकते हैं।

गौरतलब है कि 13 जनवरी को अधिसूचित यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में “इक्विटी कमेटी” बनाना अनिवार्य किया गया है। इन समितियों में ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रावधान है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों को शिकायत निवारण और संस्थागत संरक्षण से वंचित किया गया है।

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