सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई के एसआईआर अधिकार को बरकरार रखा, कहा– निष्पक्ष चुनाव का हिस्सा है मतदाता सूची संशोधन
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में एसआईआर प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग के पास मतदाता सूची संशोधन का पूरा अधिकार है और यह निष्पक्ष चुनाव का हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (27 मई) को बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को बरकरार रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का एसआईआर कराना निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है और यह प्रक्रिया निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनावों के संवैधानिक उद्देश्य से सीधे जुड़ी हुई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और संबंधित नियमों के तहत एसआईआर करने का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने यह भी कहा कि केवल इसलिए इस प्रक्रिया को अवैध नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह सामान्य मतदाता सूची संशोधन से अलग है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एसआईआर एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया है और निर्वाचन आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कोई कार्य नहीं किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची को अपडेट करना निष्पक्ष चुनाव कराने का अभिन्न हिस्सा है और यह निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
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फैसले में कहा गया कि जब कानून स्वयं विशेष संशोधन की अनुमति देता है, तो इसे केवल इसलिए अमान्य नहीं किया जा सकता क्योंकि यह सामान्य प्रक्रिया से अलग है। अदालत ने यह भी कहा कि एसआईआर न तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम को खत्म करता है और न ही उसके नियमों का उल्लंघन करता है। यह केवल अनुच्छेद 324 के तहत संवैधानिक दायित्व को लागू करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेजों पर संदेह होता है, तो निर्वाचन आयोग उसके नाम को मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई कर सकता है। साथ ही अदालत ने माना कि इस प्रक्रिया में लोगों को सुधार, आपत्ति और अपील का पूरा अवसर दिया गया था।
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बिहार में लगभग 65 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। कुछ याचिकाओं में इसे चुनौती देते हुए कहा गया था कि निर्वाचन आयोग के पास इतने बड़े स्तर पर यह प्रक्रिया चलाने का अधिकार नहीं है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का निर्माण और संशोधन चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने का जरूरी हिस्सा है और आयोग ने अपने अधिकारों के भीतर रहकर यह कार्य किया है।
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