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बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट आज बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण मामले पर फैसला सुनाएगा। याचिकाओं में प्रक्रिया को संविधान और कानून के खिलाफ बताया गया है।

बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज यानी 27 मई को अपना फैसला सुनाएगा। इस मामले को लेकर देशभर में राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें सर्वोच्च अदालत पर टिकी हुई हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 29 जनवरी को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन याचिकाओं में गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की याचिका भी शामिल है। बिहार में यह विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पहले चरण में लागू की गई थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत इतने बड़े स्तर पर एसआईआर कराने का अधिकार नहीं है। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया नागरिकता सत्यापन जैसी लगती है, जो केवल केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मतदाता सूची में नाम जोड़ना या हटाना निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने पिछले वर्ष 12 अगस्त से मामले की अंतिम सुनवाई शुरू की थी।

एसआईआर प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग ने आंकड़े जारी कर बताया था कि प्रारूप मतदाता सूची से करीब 65 लाख नाम हटाए गए। आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम वर्ष 2002 या 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे, उन्हें उन सूचियों में दर्ज व्यक्तियों से अपने पारिवारिक संबंध साबित करने को कहा गया था।

निर्वाचन आयोग ने अदालत में कहा कि आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। वहीं, एडीआर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रक्रिया की समयसीमा और 65 लाख मतदाताओं को मृत, स्थानांतरित या अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत बताए जाने पर सवाल उठाए।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस पूरे विवाद पर स्पष्टता आने की उम्मीद है।

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