सुवेंदु सरकार के 30 दिन: बड़े फैसलों और टीएमसी में बगावत से बदला बंगाल का सियासी परिदृश्य
सुवेंदु अधिकारी सरकार के पहले महीने में आयुष्मान भारत, अन्नपूर्णा योजना, सीमा सुरक्षा और केंद्रीय योजनाओं पर बड़े फैसले हुए, जबकि टीएमसी में बगावत ने बंगाल की राजनीति गरमा दी।
पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के पहले 30 दिन प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से काफी अहम रहे हैं। सरकार ने अपने चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में कई बड़े फैसले लिए हैं, जबकि दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ती बगावत ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है।
सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत योजना को पश्चिम बंगाल में लागू करने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि जुलाई से यह योजना शुरू होगी, जिससे छह करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। इसके तहत प्रत्येक परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा मिलेगा।
सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के कार्य को तेज करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की। साथ ही अवैध घुसपैठ के खिलाफ अभियान चलाते हुए हजारों अवैध प्रवासियों की पहचान की गई।
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महिलाओं के लिए शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के तहत 25 से 60 वर्ष आयु वर्ग की पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये देने की घोषणा की गई। इसके अलावा वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया।
सरकार ने सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करने पर प्रतिबंध लगाया और निर्देश दिया कि धार्मिक प्रार्थनाएं केवल निर्धारित स्थानों पर ही हों। वहीं, अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान भी चलाया गया।
इसके अलावा पीएम श्री स्कूल, पीएम फसल बीमा योजना, उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और पीएम सूर्य घर योजना जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं को भी राज्य में लागू करने की मंजूरी दी गई।
इसी दौरान टीएमसी में भी राजनीतिक संकट गहराया। पार्टी के करीब 20 सांसदों के एनडीए को समर्थन देने की खबरों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
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