कावेरी जल विवाद: मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, कर्नाटक से तत्काल पानी छोड़ने की मांग
कावेरी जल विवाद पर तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कर्नाटक से राज्य के हिस्से का पानी तुरंत छोड़ने की मांग की है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने कावेरी नदी जल विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। राज्य सरकार ने अदालत से कर्नाटक को तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी जल तत्काल छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है। सरकार का आरोप है कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) द्वारा आवंटित पानी और कर्नाटक द्वारा छोड़ी गई वास्तविक जलराशि निर्धारित मात्रा से काफी कम है।
तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बी. करुणाकरन ने याचिका दाखिल किए जाने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। दूसरी ओर, हाल ही में कर्नाटक में कावेरी जल छोड़ने के आदेश के विरोध में प्रदर्शन भी हुए थे।
राज्य सरकार के अनुसार, 28 जुलाई 2026 को हुई सीडब्ल्यूआरसी की बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। बाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने भी इस आदेश को बरकरार रखा।
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हालांकि तमिलनाडु का दावा है कि 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बिलिगुंडलु में वास्तविक जल प्रवाह केवल 158 से 550 क्यूसेक के बीच रहा, जो निर्धारित मात्रा से काफी कम है।
राज्य सरकार ने बताया कि 3 अगस्त तक कर्नाटक के जलाशयों में कुल 77.537 टीएमसी पानी उपलब्ध था। सरकार का कहना है कि केआरएस और कबिनी बांधों के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद कर्नाटक के लिए तमिलनाडु के हिस्से का पानी छोड़ना संभव था। तमिलनाडु के अनुसार उसे 26.954 टीएमसी पानी मिलना चाहिए था, जबकि सीडब्ल्यूएमए ने केवल 4.536 टीएमसी आवंटित किया, जो पर्याप्त नहीं है।
इस बीच, विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) ने भी सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका दाखिल कर कर्नाटक को वर्ष 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले और सीडब्ल्यूएमए के निर्देशों का पालन करते हुए तमिलनाडु के हिस्से का पूरा पानी तत्काल छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है।