सज्जन कुमार के घर पहुंचे तीन दिल्ली भाजपा सांसद, पार्टी अध्यक्ष ने किया तलब
1984 सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार के निधन पर उनके घर शोक जताने पहुंचे तीन भाजपा सांसदों को आलोचना का सामना करना पड़ा। पार्टी अध्यक्ष ने तीनों को तलब किया।
1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद उनकी मौत को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब भारतीय जनता पार्टी तक पहुंच गया है। दिल्ली भाजपा के तीन सांसदों के सज्जन कुमार के घर जाकर शोक संवेदना व्यक्त करने के बाद पार्टी के भीतर और बाहर सवाल उठने लगे हैं।
80 वर्षीय सज्जन कुमार का इस महीने की शुरुआत में निधन हुआ था। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान पांच लोगों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे सज्जन कुमार को उच्च रक्तचाप और पार्किंसन जैसी बीमारियां थीं।
उनके निधन के बाद कुछ कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक रूप से शोक जताया था। हरियाणा कांग्रेस के नेता दीपेंद्र हुड्डा की टिप्पणी पर पार्टी के भीतर भी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। अब दिल्ली भाजपा के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, योगेंद्र चंदोलिया और कमलजीत सहरावत के सज्जन कुमार के घर जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन ने तीनों सांसदों को तलब किया। उन्होंने कहा कि उन्हें वहां नहीं जाना चाहिए था।
कौन थे सज्जन कुमार?
सज्जन कुमार कांग्रेस के पूर्व सांसद थे। उन्होंने 1980 में बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया था। इसके बाद 1991 और 2004 में भी वह कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचे।
1984 के दंगों में उनकी भूमिका को लेकर उन पर हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और हिंसा भड़काने जैसे आरोप लगाए गए। 2018 में उन्हें दंगों से जुड़े एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने एक अन्य मामले में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या के मामले में भी उन्हें दोषी ठहराया।
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने तीनों भाजपा सांसदों की यात्रा पर सवाल उठाए। दिल्ली के आप नेता सौरभ भारद्वाज ने भी भाजपा सांसदों पर निशाना साधा।
दंगों के मामलों में लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले भाजपा नेता एचएस फूलका ने भी तीनों सांसदों के दौरे की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि संवेदना दंगा पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ होनी चाहिए, जिनमें से कई लोग आज भी उस त्रासदी का दर्द झेल रहे हैं।
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