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चाय बागान श्रमिकों के नाम मतदाता सूची से हटाने पर तृणमूल का विरोध, भाजपा पर साजिश का आरोप

तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उत्तर बंगाल में हजारों आदिवासी चाय बागान श्रमिकों और राजबंशी समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए या जांच सूची में डाले गए।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उत्तर बंगाल के हजारों आदिवासी चाय बागान श्रमिकों और राजबंशी समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं या उन्हें “एडजुडिकेशन” सूची में डाल दिया गया है।

तृणमूल कांग्रेस ने इसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीतिक साजिश करार दिया है। पार्टी का कहना है कि चाय बागान क्षेत्रों में भाजपा का प्रभाव लगातार घट रहा है, इसलिए मतदाता सूची में गड़बड़ी कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।

गौरतलब है कि जनवरी में भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 के तहत चाय बागानों और सिंकोना बागानों के रिकॉर्ड को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रमिकों के नाम सूची से गायब होने पर सवाल उठ रहे हैं।

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तृणमूल नेताओं का आरोप है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे वर्षों से मतदान करते आ रहे थे और उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज भी मौजूद हैं। पार्टी ने मांग की है कि निर्वाचन आयोग इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए और प्रभावित लोगों के नाम तुरंत बहाल करे।

उत्तर बंगाल के चाय बागान क्षेत्र राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाते हैं। यहां आदिवासी और राजबंशी समुदाय का प्रभाव काफी है। तृणमूल का दावा है कि इन समुदायों का समर्थन उसे मिल रहा है, जिससे भाजपा को राजनीतिक नुकसान हो सकता है।

भाजपा की ओर से फिलहाल इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राज्य में मतदाता सूची को लेकर बढ़ता विवाद आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकता है।

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