उमर खालिद को मां की सर्जरी के लिए तीन दिन की अंतरिम जमानत, दिल्ली हाईकोर्ट ने दी राहत
दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद को मां की सर्जरी और चहल्लुम में शामिल होने के लिए 1 से 3 जून तक अंतरिम जमानत दी। अदालत ने सख्त शर्तों के साथ राहत प्रदान की।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व जेएनयू छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद को 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में तीन दिन की अंतरिम जमानत प्रदान की है। अदालत ने उन्हें 1 जून से 3 जून 2026 तक राहत देते हुए मां की सर्जरी के दौरान उनकी देखभाल और अपने दिवंगत चाचा के चहल्लुम में शामिल होने की अनुमति दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने दिया। अदालत ने मानवीय आधार पर दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि उमर खालिद को सीमित अवधि के लिए निजी पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने का अवसर दिया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस, जो उमर खालिद की ओर से पेश हुए, ने अदालत को बताया कि इससे पहले भी उन्हें अपनी बहन की शादी और अन्य मानवीय परिस्थितियों में अल्पकालिक जमानत मिल चुकी है।
वहीं दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि उमर खालिद की मां की सर्जरी गंभीर नहीं है और उनकी बहनें देखभाल के लिए मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा में उन्हें अस्पताल ले जाकर वापस लाया जा सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने “सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण” अपनाते हुए अंतरिम जमानत मंजूर कर ली। कोर्ट ने शर्त रखी कि उमर खालिद केवल एक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करेंगे और जांच अधिकारी के लगातार संपर्क में रहेंगे। विस्तृत शर्तें अंतिम आदेश में दी जाएंगी।
गौरतलब है कि उमर खालिद पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के कथित “मुख्य साजिशकर्ताओं” में शामिल होने का आरोप है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
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