उमर खालिद और शरजील इमाम को फिर नहीं मिली जमानत, दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के जनवरी आदेश का हवाला देते हुए राहत नहीं दी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। यह तीसरी बार है जब हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत याचिकाओं को मंजूर नहीं किया। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश को देखते हुए फिलहाल उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की पीठ ने दोनों की याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के आदेश में बदलाव नहीं कर सकती। उस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उमर खालिद और शरजील इमाम जमानत के लिए संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या आदेश की तारीख से एक वर्ष पूरा होने पर, इनमें से जो पहले हो, दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं।
दोनों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि वे फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ी कथित बड़ी साजिश का हिस्सा थे। इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने की थी।
उमर खालिद को सितंबर 2020 में और शरजील इमाम को अगस्त 2020 में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस ने दोनों की जमानत का विरोध करते हुए उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का हवाला दिया। इससे पहले 4 जुलाई 2026 को कड़कड़डूमा अदालत ने भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था, जबकि मामले में पांच अन्य आरोपियों को राहत दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की कथित भूमिकाओं में अंतर को ध्यान में रखा था।
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