उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को SIR सुनवाई से मिल सकती है राहत, प्रतिनिधि भेजने का विकल्प संभव
उत्तर प्रदेश में SIR के तहत नोटिस पाए मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के बजाय दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर प्रतिनिधि भेजने की अनुमति मिल सकती है, जिससे प्रक्रिया आसान और सुविधाजनक होगी।
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन– SIR) के बाद जारी मसौदा मतदाता सूची में जिन मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं और जिन्हें सुनवाई के लिए नोटिस भेजे गए हैं, उन्हें जल्द ही बड़ी राहत मिल सकती है। ऐसे मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में उपस्थित होने के बजाय अपने प्रतिनिधि को भेजने का विकल्प दिया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, मतदाता अपने आवश्यक दस्तावेज निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर सकेंगे और इसके बाद अधिकृत प्रतिनिधि को प्राधिकरण पत्र (ऑथराइजेशन लेटर) के साथ सुनवाई में भेज सकेंगे। यह प्रतिनिधि स्थानीय बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी हो सकते हैं, जिन्हें राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त किया जाता है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस संबंध में निर्देश जारी करने पर विचार किया जा रहा है और यह आदेश इसी सप्ताह जारी हो सकता है। इसका उद्देश्य मतदाताओं को अनावश्यक असुविधा से बचाना और पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल, डिजिटल और पारदर्शी बनाना है।
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विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची को अपडेट किया गया है ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सही तरीके से शामिल हों और अपात्र नाम हटाए जा सकें। इस प्रक्रिया के दौरान कई मतदाताओं को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए गए थे, जिससे खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज़ के इलाकों में रहने वाले लोगों को परेशानी हो रही थी।
यदि नया निर्देश लागू होता है, तो इससे लाखों मतदाताओं को सीधा लाभ मिलेगा। वे न केवल समय और खर्च की बचत कर सकेंगे, बल्कि डिजिटल माध्यम से दस्तावेज जमा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी भी सुनिश्चित कर पाएंगे। निर्वाचन आयोग का यह कदम मतदाता सुविधा और चुनावी प्रक्रिया को सुगम बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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