पहलगाम त्रासदी के एक साल बाद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को याद कर भावुक हुआ परिवार
पहलगाम हमले में शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को परिवार ने याद किया। पिता ने कहा कि बेटे की मौत के बाद जिंदगी रुक गई और दर्द आज भी वैसा ही है।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले को एक साल बीत चुका है, लेकिन लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के परिवार के लिए समय जैसे थम गया है। 22 अप्रैल 2025 को 26 वर्षीय युवा नौसेना अधिकारी विनय नरवाल की उनके हनीमून के दौरान करीब से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
करनाल स्थित अपने घर में उनके पिता राजेश नरवाल आज भी उस दर्द को शब्दों में बयां नहीं कर पाते। वे कहते हैं, “उस दिन के बाद सब कुछ बदल गया। हम जी तो रहे हैं, लेकिन सच में जिंदगी उसी दिन खत्म हो गई थी।” उनकी आवाज में गुस्सा नहीं, बल्कि गहरा और अंतहीन दुख झलकता है।
राजेश नरवाल बताते हैं कि विनय बचपन से ही अपने सपनों को लेकर स्पष्ट थे। उन्होंने एक डायरी में अपने करियर, परिवार और भविष्य की योजनाएं लिख रखी थीं। “वह बहुत कम उम्र में अधिकारी बन गए थे। उन्हें पता था कि उन्हें क्या करना है,” उनके पिता कहते हैं।
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विनय की शादी 16 अप्रैल 2025 को हुई थी और कुछ ही दिनों बाद वह हनीमून पर कश्मीर गए थे। शादी की खुशियां अभी खत्म भी नहीं हुई थीं कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
विनय का सपना देश की सेवा करना था। पहले वे वायुसेना में जाना चाहते थे, लेकिन नौसेना में चयन होने पर भी बेहद खुश थे। उनके परिवार में पत्नी हिमांशी, बहन और दादा-दादी आज भी उनकी यादों के सहारे जी रहे हैं।
परिवार मानता है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सच वह खालीपन है, जो कभी भर नहीं सकता।
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