पश्चिम बंगाल SIR: मतदाता सूची से नाम हटाने में असामान्य रुझान, महिलाओं की संख्या अधिक
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची से महिलाओं के नाम अधिक हटाए गए। कई मतदान केंद्रों पर असामान्य और असंतुलित पैटर्न दिखे, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर कई असामान्य पैटर्न सामने आए हैं। मतदान केंद्र स्तर के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस प्रक्रिया में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के नाम अधिक संख्या में मतदाता सूची से हटाए गए हैं। ऐसा ही रुझान तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्यों में भी देखा गया है।
राज्य में कुल 58 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। हालांकि, यह विश्लेषण उन 56 लाख हटाए गए मतदाताओं पर आधारित है, जिनके मतदान केंद्र स्तर के आंकड़े मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में लगभग 4 लाख महिलाओं के नाम पुरुषों की तुलना में अधिक हटाए गए।
विशेष रूप से चौंकाने वाली बात यह है कि 850 से अधिक मतदान केंद्रों पर हटाए गए मतदाताओं में 75 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं थीं। यह स्थिति मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में संभावित लैंगिक पक्षपात की ओर संकेत करती है।
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मतदान केंद्र स्तर पर किए गए विश्लेषण में इस तरह की कुल सात अन्य विसंगतियां भी सामने आई हैं। इनमें कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक संख्या में मतदाताओं के नाम हटाया जाना, कुछ आयु वर्गों में असामान्य रूप से अधिक मौतों के आधार पर नाम हटाना और कुछ श्रेणियों में असंतुलित आंकड़े शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं की मौत के आधार पर नाम हटाए जाने के मामलों में असामान्य वृद्धि जैसे रुझान गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इस तरह के आंकड़े न केवल मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर असर डालते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी चिंताएं पैदा करते हैं।
विश्लेषण में सामने आए इन अनियमितताओं की गहन जांच की मांग की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित न हो।
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