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पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग में गंभीर संकट, तृणमूल सांसद रितब्रत ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की

तृणमूल सांसद रितब्रत बनर्जी ने जूट की बढ़ती कीमतों और मिलों के बंद होने पर चिंता जताई। उन्होंने पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग में गंभीर संकट को लेकर केंद्र से हस्तक्षेप मांगा।

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रितब्रत बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के कच्चे जूट उद्योग में पैदा हुए “गंभीर संकट” को लेकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने गुरुवार (1 जनवरी, 2026) को केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को पत्र लिखकर कहा कि जूट उद्योग में “आर्थिक और सामाजिक आपात स्थिति” तेजी से गहराती जा रही है और इस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

रितब्रत बनर्जी ने अपने पत्र में कहा कि कच्चे जूट की कीमतें लगातार बढ़ने और अस्थिर होने के कारण कई जूट मिलें बंद होने की कगार पर हैं। उन्होंने बताया कि जूट मिल मालिकों के लिए महंगे कच्चे माल की खरीद करना मुश्किल हो गया है, जिसके चलते उत्पादन घटाता जा रहा है और श्रमिकों की नौकरियां जा रही हैं।

पत्र में सांसद ने कहा, “वर्तमान स्थिति — जिसमें कच्चे जूट की भारी कमी, अत्यधिक मूल्य अस्थिरता, मिलों के संचालन में कटौती और रोजगार का नुकसान शामिल है। यह पिछले कुछ वर्षों में नीतिगत कमियों का परिणाम है।” उन्होंने विशेष रूप से कच्चे जूट के लिए किसी ठोस मूल्य-स्थिरीकरण व्यवस्था की कमी और पैकेजिंग कमोडिटीज सप्लाई ऑर्डर (PCSO) तथा गन्नी ट्रेड पॉलिसी (GTP) के तहत अनियमित मांग योजना को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।

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रितब्रत बनर्जी ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो पश्चिम बंगाल के जूट बेल्ट में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और सामाजिक संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से कच्चे जूट की उपलब्धता सुनिश्चित करने, कीमतों को स्थिर करने और जूट मिलों को राहत देने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। सांसद ने कहा कि जूट उद्योग न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था बल्कि लाखों श्रमिक परिवारों की आजीविका का आधार है।

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