महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस के लिए दावोस WEF क्यों है अहम?
दावोस WEF में महाराष्ट्र को 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जो फडणवीस सरकार के लिए विपक्ष के आरोपों का जवाब और आर्थिक विकास का बड़ा अवसर बन सकते हैं।
स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–WEF) की वार्षिक बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भागीदारी राज्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। 17 से 24 जनवरी तक चले इस सप्ताह भर के दौरे के दौरान महाराष्ट्र को लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिन्हें फडणवीस सरकार के लिए संभावित “गेम-चेंजर” माना जा रहा है।
विपक्ष पहले से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर गुजरात के हितों को बढ़ावा देने और महाराष्ट्र की उपेक्षा करने का आरोप लगाता रहा है। ऐसे में दावोस से मिले भारी निवेश प्रस्तावों को फडणवीस सरकार विपक्ष के इन आरोपों का जवाब देने के अवसर के रूप में देख रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल के अभी लगभग साढ़े तीन वर्ष शेष हैं और इस अवधि में उन्हें दावोस में किए गए समझौता ज्ञापनों (MoUs) को ज़मीनी स्तर पर तेज़ी से लागू करना होगा। यदि इन निवेश प्रस्तावों को समय पर अमल में लाया जाता है, तो इससे न केवल राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
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हालांकि, 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की घोषणा से सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर कुछ असहजता भी देखने को मिल रही है। इसका संकेत इस बात से मिलता है कि न तो शिवसेना और न ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने इस उपलब्धि का खुलकर स्वागत किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि गठबंधन सहयोगियों के बीच इस मुद्दे पर पूरी सहमति नहीं बन पाई है।
कुल मिलाकर, दावोस WEF से मिली यह उपलब्धि फडणवीस सरकार के लिए एक बड़ा अवसर है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन निवेश प्रस्तावों को कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा जाता है।
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