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महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में फेल, विपक्ष ने 543 सीटों में से 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का सुझाव दिया

महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। विपक्ष ने 543 सीटों में से 180 महिलाओं के लिए आरक्षित करने या परिसीमन से अलग करने का सुझाव दिया।

महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शुक्रवार को हुए मतदान में 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट दिया, जिसके चलते यह विधेयक पारित नहीं हो सका। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के लिए 2014 के बाद पहली बड़ी विधायी असफलता मानी जा रही है।

विधेयक के असफल होने के बाद विपक्ष ने सरकार से सवाल किए हैं। शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सुझाव दिया कि सरकार मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में से 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से अलग कर दे।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि क्या भाजपा और उसके सहयोगी दल अगले चुनाव में 180 सीटें महिलाओं के लिए स्वेच्छा से आरक्षित करेंगे? उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो सरकार के दावों पर सवाल उठेंगे।

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कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार परिसीमन के नाम पर दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों के राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करना चाहती है।

विधेयक के गिरने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं के सम्मान का मौका खो दिया है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया।

सरकार का कहना था कि यह विधेयक लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और 2029 से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए लाया गया था, लेकिन यह पारित नहीं हो सका।

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