जोजिला टनल: कश्मीर और लद्दाख को जोड़ने वाला भारत का इंजीनियरिंग चमत्कार, सालभर रहेगा संपर्क
जोजिला टनल कश्मीर और लद्दाख को सालभर जोड़ने वाली बड़ी परियोजना है। इससे यात्रा समय घटेगा, पर्यटन बढ़ेगा और रणनीतिक व आर्थिक रूप से क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा।
भारत एक बड़े बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) मील के पत्थर की ओर बढ़ रहा है, जहां जोजिला टनल की खुदाई अंतिम ब्रेकथ्रू चरण में पहुंच गई है। यह सुरंग पूरी होने के बाद दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब, द्वि-दिशात्मक (bi-directional) सड़क सुरंगों में से एक होगी, जो ऊंचाई पर स्थित क्षेत्रों में बनाई जा रही है।
जोजिला टनल की लंबाई 13.15 किलोमीटर है और यह श्रीनगर-कारगिल-लेह राजमार्ग पर प्रसिद्ध जोजिला पास के नीचे बनाई जा रही है। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग के पास बालटाल को लद्दाख के द्रास क्षेत्र के मीनामर्ग से जोड़ती है। यह सुरंग लगभग 11,578 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और इसका उद्देश्य कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर निर्बाध सड़क संपर्क सुनिश्चित करना है।
हर साल सर्दियों में भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और तूफानों के कारण जोजिला पास बंद हो जाता है, जिससे लद्दाख कई महीनों तक देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है। यह सुरंग इस समस्या का स्थायी समाधान मानी जा रही है।
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इसके बनने से द्रास, कारगिल और लेह के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, खाद्य आपूर्ति और परिवहन तक बेहतर पहुंच मिलेगी। साथ ही यात्रा समय भी काफी कम हो जाएगा—जो अभी लगभग 3 घंटे लगता है, वह सुरंग बनने के बाद केवल 15 मिनट रह जाएगा।
इस टनल को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, वेंटिलेशन सिस्टम, इमरजेंसी रेस्क्यू, रेडियो कम्युनिकेशन, पावर बैकअप और ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं। सुरक्षा के लिए तीन बड़े वर्टिकल शाफ्ट भी बनाए गए हैं, जिनमें से एक भारत का सबसे लंबा शाफ्ट है।
कठिन भूगोल, -20 डिग्री तापमान और हिमस्खलन जैसी चुनौतियों के बावजूद इसका निर्माण जारी रहा। यह परियोजना पर्यटन, व्यापार और रक्षा आपूर्ति को भी मजबूत करेगी, क्योंकि यह क्षेत्र सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
ब्रेकथ्रू के बाद अब लाइनिंग, इलेक्ट्रिकल और सेफ्टी कार्य किए जाएंगे। परियोजना का लक्ष्य 2028 तक पूरा करना है।