धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अरविंद केजरीवाल ने बताया लोकतंत्र की जीत, नीट व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अरविंद केजरीवाल ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने नीट परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे भारतीय लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि छात्रों, युवाओं और जेन-ज़ी (Gen Z) के शांतिपूर्ण संघर्ष के सामने केंद्र सरकार को झुकना पड़ा।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, "देश के सभी युवाओं और खासकर जेन-ज़ी को बधाई। आपके संघर्ष का परिणाम सामने आया है और आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।"
उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंत्री के इस्तीफे का मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान में लोगों के विश्वास की जीत है। केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ समय से लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ रहा था, लेकिन इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई जनता की आवाज प्रभाव डाल सकती है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की पूरी व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की मांग की ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
वहीं, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया। उन्होंने मांग की कि बिहार और गुजरात में आंदोलन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए सभी छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए।
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में गोपाल राय ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एक ओर बातचीत की बात करती है, जबकि दूसरी ओर आंदोलन कर रहे युवाओं पर पुलिस कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन गुजरात सहित अन्य राज्यों में भी और व्यापक हो सकता है।
गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को नीट पेपर लीक विवाद और देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की जीत बताया।
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