20 जुलाई के चलो संसद मार्च में असामाजिक तत्व घुस आए थे, घायल दिल्ली पुलिस एसआई की पत्नी ने जांच की मांग की
20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च में घायल दिल्ली पुलिस एसआई की पत्नी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
20 जुलाई को नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल हुए दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर अशोक मीणा की पत्नी नीरज मीणा ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच कुछ असामाजिक तत्व घुस आए थे, जिनकी वजह से हिंसा भड़की और पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ।
एक विशेष साक्षात्कार में नीरज मीणा ने बताया कि उनके पति 20 जुलाई की सुबह करीब साढ़े पांच बजे ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। करीब 11 बजे प्रदर्शन के दौरान उनके सिर पर पीछे से पत्थर फेंका गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने अपनी ड्यूटी नहीं छोड़ी और जिम्मेदारी निभाते रहे।
नीरज मीणा ने कहा कि उन्हें बाद में व्हाट्सऐप पर अपने पति की घायल अवस्था की तस्वीर मिली, जिसे देखकर वह स्तब्ध रह गईं। उन्होंने बताया कि उनके पति के कपड़े खून से लथपथ थे और उन्हें काफी खून बह जाने के बावजूद ड्यूटी जारी रखनी पड़ी।
उन्होंने कहा, "अगर उस दिन मेरे पति के साथ कोई बड़ी अनहोनी हो जाती तो हमारे परिवार का क्या होता? पुलिसकर्मी भी इंसान हैं और उनके भी अधिकार हैं। इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और हिंसा करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"
नीरज मीणा का कहना है कि पिछले 18 से 20 दिनों तक छात्रों का आंदोलन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन 20 जुलाई को अचानक हिंसा होना इस बात का संकेत देता है कि प्रदर्शन में बाहरी और असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे। उन्होंने कहा कि छात्रों से इस तरह की हिंसा की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने यह भी मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को पर्याप्त कानूनी और प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च के दौरान उसके 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। घटना के बाद कई एफआईआर दर्ज की गईं और पुलिस पर हमले में शामिल लोगों की पहचान के लिए जांच शुरू की गई। वहीं, दिल्ली सरकार ने छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा के बाद उन्हें वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई पर विचार करने की बात कही है, जो सीजेपी की प्रमुख मांगों में शामिल था।
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