दिल्ली कोर्ट ने एसएफआई नेता आयशी घोष के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट रद्द किए, 2021 मामले में मिली राहत
दिल्ली की अदालत ने एसएफआई संयुक्त सचिव आयशी घोष के खिलाफ 2021 मामले में जारी गैर-जमानती वारंट रद्द कर दिए। कोर्ट ने उनकी पेशी के बाद यह आदेश दिया।
दिल्ली की एक अदालत ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की संयुक्त सचिव आयशी घोष के खिलाफ 2021 के एक मामले में जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) को रद्द कर दिया है। अदालत ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट विजयश्री राठौड़ ने आयशी घोष के अदालत में पेश होने के बाद उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द किया। हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश का अभी इंतजार है।
इससे पहले बुधवार को अदालत ने आयशी घोष के खिलाफ जारी एनबीडब्ल्यू पर रोक लगा दी थी। उनके वकील ने अदालत को बताया था कि पिछली सुनवाई में वह "अपरिहार्य परिस्थितियों" के कारण पेश नहीं हो सकी थीं।
यह मामला वर्ष 2021 में दर्ज एक प्राथमिकी (एफआईआर) से जुड़ा है। यह एफआईआर दिल्ली के बाराखंभा रोड थाना में दर्ज की गई थी। मामले में तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।
आयशी घोष के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना), धारा 447 (आपराधिक अतिक्रमण) और धारा 34 (साझा इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अदालत ने अब इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 21 नवंबर की तारीख तय की है।
आयशी घोष छात्र राजनीति में एक प्रमुख चेहरा रही हैं और एसएफआई से जुड़ी हुई हैं। वह इससे पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। वर्ष 2020 में जेएनयू परिसर में हुई हिंसा के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई थीं।
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद उनके वकील ने अदालत से राहत की मांग की थी और बताया था कि पेशी में अनुपस्थिति जानबूझकर नहीं थी। अदालत ने उनकी दलील पर विचार करते हुए पहले वारंट पर रोक लगाई और बाद में उनकी उपस्थिति के बाद उसे पूरी तरह रद्द कर दिया।
अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया नवंबर में होने वाली सुनवाई के दौरान जारी रहेगी।