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गणतंत्र दिवस पर जम्मू-कश्मीर ने पहलगाम में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए नागरिक को किया सम्मानित

गणतंत्र दिवस पर जम्मू-कश्मीर ने पहलगाम आतंकी हमले में पर्यटकों को बचाते हुए शहीद हुए आदिल हुसैन शाह को मरणोपरांत सम्मानित किया।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर जम्मू-कश्मीर सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ साहस दिखाने वाले 56 लोगों को सम्मानित किया। इनमें सबसे प्रमुख नाम आदिल हुसैन शाह का है, जिन्होंने अप्रैल 2025 में पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के दौरान पर्यटकों की जान बचाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।

हापतनार गांव के निवासी आदिल हुसैन शाह पेशे से घोड़ा (पोनी) चलाने का काम करते थे। 22 अप्रैल को जब तीन भारी हथियारों से लैस आतंकियों ने बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हमला किया और धर्म पूछकर लोगों की हत्या शुरू की, तब शाह सुरक्षित स्थान पर भागने के बजाय आतंकियों के सामने डट गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने एक आतंकी से उसकी राइफल छीनने की कोशिश भी की, लेकिन इसी दौरान उन्हें गोली मार दी गई।

इस भयावह हमले में कुल 25 पर्यटकों और आदिल हुसैन शाह की जान चली गई थी। इस नरसंहार के बाद देशभर में गहरा आक्रोश देखने को मिला। भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया और आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ पाकिस्तान तथा पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में व्यापक सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू की। यह अभियान चार दिनों तक चला और अंततः संघर्षविराम के साथ समाप्त हुआ।

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आदिल हुसैन शाह के अंतिम संस्कार में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी शामिल हुए थे। उनके साथ सैकड़ों स्थानीय लोग नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।

गणतंत्र दिवस पर दिया गया यह सम्मान शाह की असाधारण बहादुरी और निस्वार्थ साहस की मान्यता है। इस सम्मान में उन्हें मरणोपरांत एक पदक और एक लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की गई है। सरकार ने कहा कि आदिल हुसैन शाह का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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