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ईरान पर अमेरिकी हमले तेज, 35 की मौत; नौसैनिक नाकाबंदी फिर लागू, खाड़ी से ऊर्जा निर्यात रोकने की ईरान की चेतावनी

अमेरिका ने ईरान पर हमले तेज करते हुए नौसैनिक नाकाबंदी फिर लागू कर दी। ईरान ने खाड़ी से ऊर्जा निर्यात रोकने की चेतावनी दी, जिससे वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई।

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ाते हुए उसके खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी दोबारा लागू कर दी है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन करमनपौर के अनुसार, हालिया अमेरिकी हवाई हमलों में कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है, जबकि 72 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती कराए गए हैं। इस बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंकाओं को फिर से बढ़ा दिया है।

अमेरिका ने यह कार्रवाई ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों के जवाब में की है। अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, एक सैन्य बैरक पर हुए हमले में कम से कम सात सैनिक मारे गए, जबकि देशभर में 260 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ था। इसके जवाब में तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को प्रभावी रूप से बाधित कर दिया, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ और कच्चे तेल, उर्वरक तथा अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ गई।

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इस बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका की नाकाबंदी जारी रहती है तो खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात पूरी तरह रोका जा सकता है। आईआरजीसी ने कहा, "या तो इस क्षेत्र से ऊर्जा निर्यात सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए नहीं।"

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक ग्रेटर तुंब द्वीप पर ईरान की मिसाइल और रक्षा प्रणालियों को भी निशाना बनाया। इसके अलावा नाकाबंदी लागू होने के 17 घंटे के भीतर दो वाणिज्यिक जहाजों को रोकने का भी दावा किया गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस के समुद्री परिवहन का प्रमुख मार्ग है। बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी दिखने लगा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा कीमतों में और तेज उछाल आ सकता है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।

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