निर्देशक हनी त्रेहान की फिल्म 'सतलुज' एक ऐसी फिल्म है, जो बिना शोर-शराबे और अतिनाटकीयता के सच्चाई, साहस और न्याय की लड़ाई को पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। पहले 'पंजाब 95' के नाम से चर्चित रही यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित है, जिन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाई थी।
फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने मुख्य भूमिका निभाई है और यह उनके करियर के सबसे परिपक्व अभिनय में से एक माना जा सकता है। उन्होंने अपने किरदार को बिना किसी बनावटी नाटकीयता के बेहद सहजता से निभाया है। उनके चेहरे के भाव, संवादों से अधिक प्रभाव छोड़ते हैं और दर्शकों को कहानी से भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं।
फिल्म की कहानी एक बैंक प्रबंधक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे कुछ संदिग्ध घटनाओं और रहस्यमयी गुमशुदगियों की जानकारी मिलती है। सच की तलाश धीरे-धीरे उसे सत्ता और व्यवस्था के खिलाफ खड़ा कर देती है। निर्देशक ने कहानी को थ्रिलर बनाने के बजाय यथार्थवादी अंदाज में प्रस्तुत किया है, जिससे फिल्म का प्रभाव और गहरा हो जाता है।
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सुविंदर विक्की और अर्जुन रामपाल ने भी अपने सीमित लेकिन प्रभावशाली किरदारों से फिल्म को मजबूती दी है। सिनेमैटोग्राफी, बैकग्राउंड म्यूजिक और प्रोडक्शन डिजाइन 90 के दशक के पंजाब का वास्तविक माहौल रचने में सफल रहे हैं।
हालांकि फिल्म की धीमी रफ्तार कुछ दर्शकों की परीक्षा ले सकती है और शुरुआती हिस्से को थोड़ा छोटा किया जा सकता था। इसके बावजूद, फिल्म अपनी संवेदनशील प्रस्तुति और सशक्त अभिनय के दम पर दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ती है।
कानूनी विवादों और सेंसर बोर्ड के साथ लंबे संघर्ष के बाद रिलीज हुई 'सतलुज' अब ज़ी5 पर स्ट्रीम हो रही है। यदि आप वास्तविक घटनाओं पर आधारित गंभीर और विचारोत्तेजक सिनेमा पसंद करते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखी जा सकती है। इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार दिए गए हैं।