कांग्रेस पार्टी ने भारत सरकार से सवाल किया है कि विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच प्रस्तावित बैठक को लेकर अब तक चुप्पी क्यों साध रखी है। पार्टी का यह सवाल भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में एक संवादात्मक सत्र के दौरान दी गई टिप्पणियों के बाद उठाया गया है। इस सत्र के दौरान सर्जियो गोर ने दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क को लेकर चर्चा की, जिसमें जयशंकर और रुबियो के बीच संभावित मुलाकात का जिक्र सामने आया। हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस प्रस्तावित बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि अब तक जारी नहीं की गई है, जिसे लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरने की कोशिश की है। विपक्षी दल ने इसे सरकार की पारदर्शिता की कमी के रूप में पेश करते हुए कहा है कि इतनी महत्वपूर्ण कूटनीतिक गतिविधि पर जनता को अंधेरे में नहीं रखा जाना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जब अमेरिकी राजदूत स्वयं सार्वजनिक मंच पर इस तरह की बैठक का संकेत दे रहे हैं, तो भारत सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में हाल के वर्षों में तेजी देखी गई है, और दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच नियमित संवाद होता रहा है। ऐसे में किसी प्रस्तावित बैठक को लेकर सरकार की चुप्पी को विपक्ष कूटनीतिक रणनीति में पारदर्शिता की कमी के तौर पर उठा रहा है। कांग्रेस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका संबंधों पर देश-विदेश में निगरानी बनी हुई है, खासकर व्यापार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग के मुद्दों पर। पार्टी ने मांग की है कि सरकार इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाए और जनता तथा संसद को इस संभावित उच्चस्तरीय बैठक की वास्तविक स्थिति से अवगत कराए। फिलहाल विदेश मंत्रालय की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार कांग्रेस के इस सवाल का जवाब देती है और क्या जयशंकर-रुबियो के बीच प्रस्तावित बैठक को लेकर आधिकारिक पुष्टि जल्द सामने आती है।
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