राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसका वैश्विक ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।
जर्मनी के बर्लिन में जर्मन सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा भारत के लिए दूर की घटना नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक समन्वित रणनीति अपनाई है। पश्चिम एशिया पर गठित मंत्रियों का समूह लगातार हालात की समीक्षा कर रहा है और समय-समय पर आवश्यक कदम सुझा रहा है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और महंगाई पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
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इस दौरान राजनाथ सिंह जर्मनी के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक रोडमैप पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। इसमें साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
उन्होंने “आत्मनिर्भर भारत” पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल खरीदारी का कार्यक्रम नहीं, बल्कि संयुक्त रूप से निर्माण और नवाचार का अवसर है। उन्होंने जर्मनी की औद्योगिक क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का बेहतर समाधान निकाल सकते हैं।
इसके अलावा, भारत और जर्मनी के बीच पनडुब्बी निर्माण और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के प्रशिक्षण में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।
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