पाकिस्तान से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां एक निजी स्कूल की छत अचानक गिर जाने से 30 से अधिक मासूम बच्चों की जान चली गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मृतकों में शामिल सभी बच्चे 13 वर्ष से कम उम्र के थे। इस दुखद घटना के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और स्कूल के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी बड़ी त्रासदी के पीछे क्या कारण रहे। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश इस घटना से स्तब्ध है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और प्रशासन को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस घटना ने पाकिस्तान में निजी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तान के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 46.5 प्रतिशत छात्र निजी स्कूलों में पढ़ते हैं, जबकि विश्व बैंक का अनुमान है कि यह आंकड़ा लगभग 49 प्रतिशत यानी करीब 2.17 करोड़ बच्चों तक पहुंचता है। राष्ट्रीय पाठ्यक्रम परिषद की पूर्व निदेशक मरियम चुगताई ने इस संदर्भ में कहा कि अभिभावकों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में मिलने वाली शिक्षा पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण नहीं होती। उनके अनुसार, कई सरकारी स्कूल शिक्षा के केंद्र की बजाय केवल बच्चों को दिन भर बिठाए रखने की जगह बनकर रह गए हैं। गरीब परिवारों को लगता है कि बच्चे का सरकारी स्कूल में समय बर्बाद हो रहा है, इसलिए वे कई नौकरियां करके भी अपने बच्चों को कम शुल्क वाले निजी स्कूलों में पढ़ाना पसंद करते हैं। हालांकि चुगताई ने यह भी चेताया कि इन निजी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होने की कोई गारंटी नहीं होती और सुरक्षा जांच का भी अभाव रहता है। उन्होंने बताया कि निजी स्कूलों का पंजीकरण तो अनिवार्य है, लेकिन शिक्षण गुणवत्ता या भवन सुरक्षा की जांच बेहद कमजोर है और शायद ही कभी इसे सख्ती से लागू किया जाता है। कई कम शुल्क वाले स्कूल घरों को तब्दील करके चलाए जाते हैं, जहां छात्रों की संख्या बढ़ने के साथ अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी जाती हैं। चुगताई ने जोर देकर कहा कि जब तक बच्चों की सुरक्षा को मुनाफे का जरिया बनाने के बजाय अनिवार्य शर्त के रूप में नहीं देखा जाएगा, तब तक ऐसी त्रासदियां होती रहेंगी।
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