आम आदमी पार्टी (AAP) ने उन सात राज्यसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है, जिन्होंने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा है। इस संबंध में पार्टी के सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को एक औपचारिक याचिका सौंपी है।
संजय सिंह ने कहा कि इन सांसदों का यह कदम दल-बदल विरोधी कानून (Anti-defection Law) का स्पष्ट उल्लंघन है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी सात सांसदों को तत्काल अयोग्य घोषित किया जाए।
हाल ही में AAP के तीन प्रमुख राज्यसभा सांसद—राघव चड्ढा, अशोक कुमार मित्तल और संदीप पाठक—ने पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि वे संविधान के प्रावधानों के तहत दो-तिहाई संख्या में अलग होकर बीजेपी में विलय कर रहे हैं।
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राघव चड्ढा ने इस फैसले पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी से दूरी इसलिए बनाई क्योंकि वे “गलत कार्यों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें महसूस हुआ कि वे गलत पार्टी में हैं और अब वे जनता के बीच जाकर नई राजनीति करना चाहते हैं।
चड्ढा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और राष्ट्रीय हितों से भटक गई है और अब व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने 15 वर्षों तक पार्टी को अपनी मेहनत दी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं।
पंजाब से जुड़े AAP के कुछ लोकसभा सांसदों के नाम भी इस राजनीतिक हलचल में चर्चा में हैं, हालांकि वे अभी पार्टी के साथ बने हुए हैं।
2022 से राज्यसभा में AAP का प्रतिनिधित्व कर रहे ये नेता अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, जिससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और AAP तथा BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
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