अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने पाकिस्तान और चीन से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह साइबर अपराधियों को फर्जी सिम कार्ड, मोबाइल नंबर, ओटीपी और व्हाट्सऐप खातों जैसी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराता था। मामले में पश्चिम बंगाल से दो आरोपियों इमरान अली पियादा और इंजामुल को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके पास से सात मोबाइल फोन, सिम कार्ड और एक राउटर बरामद किया है।
अहमदाबाद पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि आरोपी पिछले चार-पांच वर्षों से इस नेटवर्क से जुड़े थे। जांच में सामने आया है कि गिरोह से संबंधित गतिविधियों को लेकर देश के 26 राज्यों में 251 शिकायतें दर्ज हैं।
इस तरह चलता था ‘बॉस स्कैम’
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी खुद को भारतीय रिजर्व बैंक या किसी सरकारी संस्था का अधिकारी बताकर कंपनियों के अधिकारियों को निशाना बनाते थे। उन्हें व्हाट्सऐप या ईमेल के जरिए संदिग्ध जिप फाइल भेजी जाती थी। फाइल खोलते ही अपराधी व्हाट्सऐप वेब सत्र पर नियंत्रण हासिल कर लेते थे।
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इसके बाद वे कंपनी के सीईओ या निदेशक के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को तत्काल धन हस्तांतरण का निर्देश देते थे। फर्जी सिम और ओटीपी के जरिए बनाए गए व्हाट्सऐप खातों से ठगी को अंजाम दिया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने करीब 4,500 सिम कार्ड जुटाए थे और लगभग 21,000 ओटीपी उपलब्ध कराए। प्रत्येक ओटीपी के लिए पैसे लिए जाते थे। इस नेटवर्क से करीब 10,000 मोबाइल और लैपटॉप डिवाइस जुड़े होने की बात सामने आई है, जिन्हें पुलिस ने निष्क्रिय कर दिया है।
पुलिस का कहना है कि इमरान दूरसंचार कंपनियों के एजेंट के तौर पर काम करता था और ग्राहकों के बायोमेट्रिक विवरण का कथित दुरुपयोग कर फर्जी सिम हासिल करता था। दूसरे आरोपी इंजामुल पर साइबर अपराधियों के साथ समन्वय करने का आरोप है।
पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि बिना सत्यापन के किसी अनजान लिंक या फाइल को न खोलें। मामले में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और उसके स्थानीय सहयोगियों की जांच जारी है।
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