नासा के भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन मंगलवार को सोयुज़ एमएस-29 अंतरिक्ष यान के जरिए आठ महीने के मिशन पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए रवाना हो गए। उनके साथ रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकीना भी इस मिशन का हिस्सा हैं। खास बात यह है कि इस मिशन में भारतीय स्कूली बच्चों द्वारा बनाई गई अंतरिक्ष विषयक चित्रकृतियां भी प्रतीकात्मक पेलोड के रूप में भेजी गई हैं।
यह अंतरिक्ष यान कजाकिस्तान के बाइकोनूर कॉसमोड्रोम से भारतीय समयानुसार रात 8:17 बजे प्रक्षेपित हुआ। लगभग तीन घंटे की यात्रा के बाद इसका आईएसएस के प्रिचाल मॉडल से स्वचालित रूप से जुड़ना निर्धारित है। यह अनिल मेनन की पहली अंतरिक्ष यात्रा है, जबकि दुब्रोव और किकीना का यह दूसरा मिशन है।
49 वर्षीय अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ। उनके पिता के. पी. शंकरण मेनन मूल रूप से केरल के पलक्कड़ जिले के ओट्टापालम के रहने वाले हैं, जबकि उनकी मां एलिजाबेथ यूक्रेन मूल की हैं। पेशे से आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ रहे मेनन अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल भी हैं। वे 2014 में नासा से जुड़े और बाद में स्पेसएक्स में चिकित्सा कार्यक्रम विकसित करने तथा मानव अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2021 में उनका चयन नासा के अंतरिक्ष यात्री के रूप में हुआ।
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मिशन के साथ भेजी गई भारतीय बच्चों की चित्रकृतियां "फर्स्ट फॉरएवर" प्रतियोगिता से चुनी गई हैं। यह प्रतियोगिता दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन की ऐतिहासिक उड़ान की 65वीं वर्षगांठ और भारत-रूस अंतरिक्ष सहयोग के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी।
आईएसएस पर आठ महीने के प्रवास के दौरान अनिल मेनन मानव शरीर पर सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव, रक्त प्रवाह, नसों की संरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अल्ट्रासाउंड तकनीक, अंतरिक्ष में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल निर्माण तथा अंतरिक्ष में चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। उनकी पृथ्वी पर वापसी अप्रैल 2027 में निर्धारित है।
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