अमेरिकी टेक दिग्गज एप्पल ने भारत की एक अदालत से अनुरोध किया है कि वह देश की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI), को उसकी वैश्विक वित्तीय जानकारियां मांगने से रोके। यह जानकारी एप्पल के ऐप स्टोर नीतियों से जुड़ी एक जांच के तहत मांगी जा रही है। कोर्ट दस्तावेज़ों के अनुसार, एप्पल ने यह कदम उस समय उठाया है जब वह स्वयं उस कानून की वैधता को चुनौती दे रहा है, जिसके तहत जुर्माने की गणना की जाती है।
एप्पल इस समय CCI के साथ एक बड़े कानूनी संघर्ष में फंसा हुआ है। CCI की जांच में आरोप लगाया गया है कि एप्पल ने अपने ऐप स्टोर में प्रभुत्वशाली स्थिति का दुरुपयोग किया। हालांकि, एप्पल ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। इस मामले में न तो एप्पल और न ही CCI ने रॉयटर्स की टिप्पणी मांगने पर कोई प्रतिक्रिया दी।
एप्पल का कहना है कि यदि CCI जुर्माने की गणना के लिए कंपनी के वैश्विक कारोबार (ग्लोबल टर्नओवर) को आधार बनाती है, तो उस पर लगभग 38 अरब डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी आशंका के चलते एप्पल ने वर्ष 2024 में लागू किए गए जुर्माने से जुड़े नियमों को भारतीय अदालत में चुनौती दी है। यह मामला अभी विचाराधीन है।
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इसके बावजूद, CCI ने 31 दिसंबर को एक गोपनीय आदेश के जरिए एप्पल से उसकी वित्तीय जानकारी मांगी। इसके बाद एप्पल ने 15 जनवरी को दायर एक याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि जब तक कानूनी चुनौती का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक CCI को कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से रोका जाए और पूरी जांच पर रोक लगाई जाए।
एप्पल का तर्क है कि यदि उसे अभी जानकारी देने के लिए मजबूर किया गया, तो इससे उसके मुख्य कानूनी दावे का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। वहीं, CCI का कहना है कि कड़े जुर्माना नियम बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा कानून उल्लंघन को रोकने के लिए जरूरी हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 27 जनवरी को होने वाली है।
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