केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा कराए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को सुप्रीम कोर्ट से मिली मंजूरी का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने यह प्रक्रिया पूरी तरह सही तरीके से कराई थी और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को कई आधारों पर चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी मुद्दों को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा, “मतदाता सूची ही तय करती है कि चुनाव में कौन जीतेगा और कौन हारेगा। इसलिए चुनाव आयोग ने सही तरीके से एसआईआर प्रक्रिया को लागू किया और यह आगे भी जारी रहेगी।”
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बिहार में चुनाव आयोग द्वारा कराए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को वैध ठहराया। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत मतदाता सूची में संशोधन और पुनरीक्षण करने का अधिकार है।
और पढ़ें: असम में UCC बिल पास, बहुविवाह पर लगेगी रोक; लिव-इन रिश्तों का पंजीकरण होगा अनिवार्य
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना बेहद जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया कानून के दायरे में है और इसे असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता।
बिहार में इस प्रक्रिया के दौरान करीब 65 लाख नाम प्रारूप मतदाता सूची से हटाए गए थे। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि यह प्रक्रिया एनआरसी जैसी है और चुनाव आयोग को नागरिकता जांचने का अधिकार नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
कानून मंत्री के बयान के बाद अब यह साफ माना जा रहा है कि चुनाव आयोग भविष्य में भी अन्य राज्यों में इसी तरह के विशेष पुनरीक्षण अभियान चला सकता है।
और पढ़ें: भारत कनेक्ट ने पार किए 10 लाख ई-चालान लेनदेन, 60 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान