एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में बड़ा बयान देते हुए आरोप लगाया कि देश में मुसलमानों को एक योजनाबद्ध एजेंडे के तहत निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ सरकारी प्रक्रियाओं और नीतियों को समुदाय विशेष के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है।
ओवैसी ने कहा कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, “एनआरसी और एनपीआर गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मैपिंग जरूरी है और अगर मैपिंग नहीं हुई तो माता-पिता के नाम के आधार पर यह प्रक्रिया की जाएगी।”
उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रक्रियाओं के जरिए गरीबों, अल्पसंख्यकों और खासतौर पर मुसलमानों में डर का माहौल बनाया जा रहा है। ओवैसी ने कहा कि सरकार को लोगों में भय पैदा करने के बजाय विश्वास कायम करना चाहिए।
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एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है और किसी भी समुदाय को अलग-थलग करने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।
ओवैसी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता अब इन मुद्दों को समझ रही है और लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। भाजपा नेताओं ने ओवैसी के आरोपों को निराधार बताया है, जबकि विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने उनके बयान का समर्थन किया है।
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