असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में जलभराव और तबाही के कारण जनजीवन प्रभावित है। इस बीच राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री केशब महंत ने कहा है कि बाढ़ से होने वाली सभी मौतें सीधे पानी के तेज बहाव के कारण नहीं होतीं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग “बाढ़ देखने की जिज्ञासा” के कारण भी अपनी जान गंवा देते हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, 22 जुलाई 2026 तक राज्य में जारी बाढ़ की मौजूदा लहर के दौरान कुल 41 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से पिछले 48 घंटों में ही कम से कम 31 लोगों की जान गई है। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में पूर्वी असम के शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट शामिल हैं।
राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित तीन जिलों में करीब 100 लोग अभी भी लापता हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं।
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मंत्री केशब महंत ने लोगों से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि कई बार लोग बाढ़ की स्थिति देखने, वीडियो बनाने या पानी के तेज बहाव के करीब जाने की कोशिश करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
असम में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ एक बड़ी समस्या बनकर सामने आती है। इस बार भी लगातार बारिश, नदियों के बढ़ते जलस्तर और कई इलाकों में जलभराव के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों की व्यवस्था की है और जरूरतमंद लोगों तक भोजन, चिकित्सा सहायता तथा अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
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