भारी बारिश के कारण असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य में अब तक 95 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1.6 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 563 गांव बाढ़ की चपेट में हैं और शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां 57 हजार से अधिक लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। इसके बाद गोलाघाट में लगभग 34 हजार और जोरहाट में 25 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
राज्य के 14 जिले अब भी हाई अलर्ट पर हैं। राजधानी गुवाहाटी के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन लगातार नदियों के जलस्तर पर नजर रखे हुए है, जबकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जलग्रहण क्षेत्रों में और बारिश की संभावना जताई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। प्रशासन ने 45 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां 12,300 से अधिक लोग रह रहे हैं। इसके अलावा 59 राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से 32 हजार से अधिक लोगों को चावल, दाल, नमक और पशुओं का चारा सहित आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
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केंद्र सरकार ने असम को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने बुधवार को डिब्रूगढ़ और अन्य प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत, पुनर्वास और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है और हालात सामान्य होने में समय लगेगा। साथ ही केंद्र प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और संपत्ति के नुकसान का मुआवजा उपलब्ध कराएगा।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने प्रधानमंत्री मोदी और जे.पी. नड्डा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर राहत कार्यों में जुटी है। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के नियमों में राहत देने का भी अनुरोध किया है, ताकि अधिक से अधिक प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता मिल सके।
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