असम की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर हुआ है। राज्य की मंत्री नंदिता गारलोसा ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से टिकट नहीं मिलने के बाद पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गईं। अब वे हाफलोंग सीट से चुनाव लड़ेंगी, जिसकी घोषणा कांग्रेस ने की है।
नंदिता गारलोसा 2022 से हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार में बिजली, सहकारिता, खनन, खनिज और जनजातीय आस्था एवं संस्कृति विभाग की मंत्री थीं। इससे पहले कांग्रेस ने इस सीट से निर्मल लांगथासा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में उन्होंने “जनहित” में अपना नाम वापस लेकर गारलोसा के लिए जगह छोड़ दी।
कांग्रेस ने गारलोसा का स्वागत करते हुए कहा कि वे पिछले पांच वर्षों से दीमा हसाओ की आवाज रही हैं और हमेशा अपने सिद्धांतों पर कायम रहीं। वहीं, कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कॉर्पोरेट हितों को जनजातीय जमीन अधिकारों से ऊपर रख रहे हैं।
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बीजेपी ने इस बार हाफलोंग सीट से गारलोसा की जगह नए चेहरे रूपाली लांगथासा को टिकट दिया है। इस बीच, सरमा ने गारलोसा के आवास का दौरा भी किया, हालांकि दोनों नेताओं ने मुलाकात पर कोई टिप्पणी नहीं की।
असम विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल 2026 को होंगे, जिसमें 126 सीटों पर मतदान होगा। मतगणना 4 मई को होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि गारलोसा के इस फैसले से हाफलोंग क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
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